केंद्रीय सचिवालय
केंद्रीय सचिवालय में केंद्र सरकार के सभी मंत्रालय और विभाग शामिल हैं। अर्थात् प्रशासन की दृष्टि से केंद्र सरकार विभिन्न मंत्रालय और विभागों में विभक्त हैं। केंद्रीय सचिवालय ऐसे सभी मंत्रालयों और विभागों की समष्टि है। एक मंत्रालय में सामान्यतः दो से चार विभाग होते हैं, किंतु किसी किसी मंत्रालय में कोई विभाग नहीं होता, जैसे- विदेश मंत्रलय। इसी प्रकार कुछ ऐसे विभाग भी हैं जिन्हें किसी मंत्रालय के अधीन नहीं रखा गया है, जैसे- परमाणु ऊर्जा विभाग। मंत्रालयों और विभागों के राजनीतिक प्रमुख मंत्रीगण तथा प्रशासनिक प्रमुख सचिवगण होते हैं।
मंत्रालय की संरचनाः
केंद्र सरकार के मंत्रालय विशेष की संरचना तीन स्तरीय है-
1- एक राजनीतिक प्रमुख अर्थात कैबिनेट मंत्री जिसकी सहायतार्थ राज्यमंत्री और उपमंत्री होते हैं। किंतु कभी कभी राज्यमंत्री भी स्वतंत्र प्रभार में मंत्रालय/विभाग का राजनीतिक प्रमुख होता है।
2- सचिव की अध्यक्षता में सचिवालय संगठन/सचिव लोक सेवक होता है। सचिव के सहायातार्थ संयुक्त सचिव, उपसचिव, अवर सचिव और अन्य कर्मचारी होते हैं। इस प्रकार, सचिवालय-संगठन में दो विशेष घटक-अधिकारी और कार्यालय_ कर्मचारियेां को निर्देशित और नियंत्रित करने के लिए तथा लिपिकीय कार्य को निष्पादित करने के लिए होते हैं,
3- विभाग-प्रमुख की अध्यक्षता में कार्यकारी संगठन होता है। इन विभाग प्रमुखों को विभिन्न पदनामों, जैसे-निदेशक, महानिदेशक, आयुक्त, महानिरीक्षक, मुख्यनियंत्रक आदि के नाम से जाना जाता है।
सचिवालय के अधिकारी/कर्मचारी
सचिवालय के अधिकारियों/कर्मचारियों का वर्तमान पदक्रम इस प्रकार है-
- सचिव - अपर सचिव
- संयुक्त सचिव - निदेशक
- उप-सचिव - अवर सचिव
उपर्युक्त में से प्रथम तीन पदक्रम के अधिकारी ‘उच्च श्रेणी के प्रबंधन’ का कार्य तथा अंतिम तीन पदक्रम के अधिकारी ‘मध्यम श्रेणी के प्रबंधन’ का कार्य देखते हैं। ये सभी अधिकारी अपने स्तर पर कार्यो का निपटान करते हैं तथा महत्वपूर्ण विषयों को उच्च अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। इसके अतिरिक्त, ये सब अधिकारी भारत सरकार के हित को ध्यान में रखकर अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हैं। इसीलिए सचिव को सचिव, भारत सरकार के रूप में पदनामित किया गया है, न कि संबद्ध मंत्री/मंत्रालय के सचिव के रूप में।
सचिव की भूमिकाएँ निम्नलिखित हैंः
- वह मंत्रलय/विभाग पर प्रशासनिक प्रमुख होता है। इस संदर्भ में उसकी जिम्मेदारी पूर्ण और विभाजित हैं।
- (ह नीतिगत और प्रशासनिक मामलों के सभी पहलुओं पर मंत्री का प्रमुख सलाहकार होता है।
- वह, संसदीय लोक लेखा समिति के समक्ष अपने मंत्रलय/विभाग का प्रतिनिधित्व करता है।
अपर सचिव किसी विभाग अथवा विभाग के किसी स्कंध (विंग) का प्रभारी होता है। दूसरी ओर, संयुक्त सचिव किसी विभाग के स्कंध का प्रभारी होता है। संयुक्त सचिव का दर्जा और वेतन अपर सचिव यदि किसी विभाग का प्रभारी नहीं है तो कोई अधिक अंतर नहीं है। केंद्र सरकार के पुनर्गठन पर रिचर्ड टोटनहम की रिपोर्ट (1945) में यह उल्लेख है कि अपर सचिवों और संयुक्त सचिवों को न ही सस्ता सचिव और न ही अधिक खर्चीला उपसचिव होना चाहिए।
अपर सचिव किसी विभाग अथवा विभाग के किसी स्कंध (विंग) का प्रभारी होता है। दूसरी ओर, संयुक्त सचिव किसी विभाग के स्कंध का प्रभारी होता है। संयुक्त सचिव का दर्जा और वेतन अपर सचिव यदि किसी विभाग का प्रभारी नहीं है तो कोई अधिक अंतर नहीं है। केंद्र सरकार के पुनर्गठन पर रिचर्ड टोटनहम की रिपोर्ट (1945) में यह उल्लेख है कि फ्अपर सचिवों और संयुक्त सचिवों को न ही सस्ता सचिव और न ही अधिक खर्चीला उपसचिव होना चाहिए।

No comments:
Post a Comment
If you any doubt. Please let me know